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धूप में कुछ छाँव बचाकर रखना

  धूप में कुछ छाँव बचाकर रखना, अपने दिल में कोई एक गाँव बचाकर रखना। भीड़ में खो न जाए तेरा होना कहीं, ख़ुद से मिलने का भी इक ठाँव बचाकर रखना। थक के जब लौटेगी ये भागती हुई दुनिया, अपने हिस्से का थोड़ा सा सुकून बचाकर रखना। हर किसी से तो नहीं खोलते दिल के दरवाज़े, कुछ भरोसे के लिए घाव बचाकर रखना। ज़िन्दगी रोज़ नए रंग दिखाती है मगर, अपने अंदर कोई बचपन सा बचाकर रखना। रात जब गहरी हो और रास्ते भी खो जाएं, एक उम्मीद का छोटा सा दिया बचाकर रखना। © रविंद्र मुंडेतिया

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