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मैंने जिसे दिल से चाहा वो एक कविता थी या फिर कोई ग़ज़ल। कविता बार बार मुझसे टकराती रही, ग़ज़ल कानों में गूंजती रही। कविताओं और ग़ज़लों को किसने लिखा ये तो मैं भूल गया लेकिन पंक्तियाँ याद रह गई। कुछ पंक्तियों ने जीवन का सार बता दिया। कुछ ग़ज़लों ने जीवन दर्शन करा दिया। अब मैं भी कुछ ऐसी ही गज़ले और कविता लिखने की भरपूर कोशिश करता हूँ। यह सोचकर लिखता हूँ कि कोई तो होगा मेरी तरह जो ये कविताएँ और गज़ले पढ़ेगा। पढ़कर भले ही मेरा नाम भूल जाए चलेगा लेकिन मेरी पंक्तियाँ उसे याद रहेगी, ये मेरी कलम के लिए खास होगा।
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